दि ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड

 

दि ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड का आरंभ 12 सितम्बर, 1947 को बम्बई में हुआ कम्पनी पूर्णत: दि ओरिएण्टल इंश्योरेंस गवर्नमेंट सिक्योरिटी लाईफ इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड की सहायक कम्पनी थी तथा सामान्य बीमा कारोबार करने के लिए बनाई गयी थी 1956 से 1973 तक (सामान्य बीमा कारोबार के देश में राष्ट्रीयकृत होने तक) कम्पनी भारतीय जीवन बीमा निगम की एक सहायक कम्पनी थी। 2003 में भारतीय साधारण बीमा निगम के पास रखे सभी शेयर केन्द्रीय सरकार को अंतरित कर दिये गये हैं

 

कारोबार को सहज एवं सुचारू रूप से चलाने के लिए योजनाएं तैयार करने में कम्पनी अग्रणी है कम्पनी के पास पूर्णत: प्रशिक्षित एवं प्रेरक कार्यदल है जो कि विविध क्षेत्रों में कार्यरत है तथा निपुण है पॉवर प्लांट्स, पैट्रोकैमिकल्स, स्टील एवं कैमिकल प्लांट जैसे वृहद प्रौजेक्टों के लिए विशेष आवरण प्रदान करने में ओरिएण्टल विशिष्ट है कम्पनी ने भारत की ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार की जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के बीमा आवरण विकसित किये हैं बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने के लिए कम्पनी के पास उच्चतम तकनीकी योग्यता प्राप्त एवं सक्षम व्यावसायिकों की एक टीम है

 

वर्ष 1950 में 99,946 रूपये का प्रथम प्रीमियम अर्जित करके ओरिएण्टल इंश्योरेंस ने शुभारम्भ किया कम्पनी का मुख्य उद्देश्य था "ग्राहकों को सेवा प्रदान करना"  तथा इसे प्राप्त करने में हमें समय-समय पर बनायी गयी सुदृढ़ परंपराओं से काफी सहयोग मिला

 

ओरिएण्टल के नई दिल्ली स्थित प्रधान कार्यालय सहित देश के विभिन्न शहरों में 21 क्षेत्रीय कार्यालय, 950 से अधिक प्रचालन कार्यालय हैं (1.4.2004 तक) नेपाल, कुवैत और दुबई में कम्पनी के विदेशी कार्यालय हैं कम्पनी के कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 16000 है आरंभ में जो प्रीमियम 1 लाख रूपये से भी कम था, 1973 में वह बढ़कर 58 करोड़ रूपये हो गया तथा वर्ष 2003-04 के दौरान ये आँकड़े 2899.74 करोड़ की ऊंची रकम तक पहुंच गये

 

हमारा निगमित मिशन :

 

जनता की बढ़ रही बीमा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम एक संगठन के रूप में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को पूरा करने में योगदान देना इसके लिए हमें कारोबारी प्रचालनों के प्रभावी प्रबन्धन हेतु प्रयास करने होंगे

 

हमारे निगमित उद्देश्य :

1.   ग्राहक को केन्द्र बिन्दु रखते हुए संपूर्ण समुदाय की बीमा आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करना

 

2.   बेहतर सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से - ग्राहक के साथ मैत्रीपूर्ण रहने की हमारी परम्परा को सुदृढ़ करना

3.   कारोबार को लाभदायक ढंग से व्यवस्थित करना, फंड को न्यायपूर्ण ढंग से व्यवस्थित करना तथा निवेश योग्य राशि को सर्वोत्तम क्षेत्र में लगाना

4.   भारतीय कारोबार को बचाने की आशा को प्रकाशित करना तथा देश के हित में अन्तरराष्ट्रीय प्रचालन एवं पुनर्बीमा करना

5.   हानियों को कम करने तथा जोखिम प्रबन्धन की तकनीकों को विकसित करने हेतु कदम उठाना

6.   एक सुदृढ़ एवं गतिशील गैर-जीवन बीमाकर्त्ता के रूप में कार्य करना।

 

प्रबन्धन :

 

ओरिएण्टल इंश्यारेंस व्यावसायिक रूप से परिचालित बोर्ड द्वारा स्वतन्त्र रूप से चलने वाली कम्पनी है श्री टी.ए.पाई (जो बाद में केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बने), श्री के.आर.पुरी जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर बने तथा श्री बी.डी.पाण्डे (जो बाद में पश्चिम बंगाल के गर्वनर बने) जैसे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व वाले हमारी कम्पनी के अध्यक्ष रह चुके हैं

 

वर्तमान में श्री एम. रामदास हमारी कम्पनी के अध्यक्ष प्रबन्ध निदेशक हैं हमारी कम्पनी के निदेशक मंडल में विभिन्न क्षेत्रों में विख्यात हस्तियां शामिल हैं

  

वित्त :

 

कम्पनी की वर्ष 2002-03 (लेखा परीक्षित) के दौरान भारत में सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय 2803.41 करोड़ रूपये थी तथा भारत से बाहर की प्रीमियम राशि 64.73करोड़ रूपये थी भारत में सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम में 1.10% की वृद्घि दर्शायी दूसरी ओर (घरेलू एवं विदेशी) निवल प्रीमियम आय जो 2002-03में 1898.43करोड़ रूपये थी उसमें 7.09% की वृद्घि हुई और 2003-04में यह 2033.03 करोड़ रूपये हो गयी

 


नेपाल, दुबई और कुवैत में कम्पनी के प्रचालनों से वर्ष 2003-04 के दौरान 67.63 करोड़ रूपये का निवल प्रत्यक्ष प्रीमियम अर्जित हुआ जो कि पिछले वर्ष 64.74 करोड़ रूपये था विदेशी प्रचालनों पर निवल प्रीमियम 69.63 करोड़ रूपये रहा जबकि इसके विरूद्घ इस वर्ष विदेशी प्रचालनों के संबंध में निवल उपगत दावों की राशि 55.44% पर 38.68 करोड़ रूपये रही विदेशी प्रचालनों के फलस्वरूप अधिशेष राशि 3.24 करोड़ रूपये थी

 

ब्याज लाभांश एवं किराये से प्राप्त 437.79 करोड़ रूपये की आय तथा निवेश की बिक्री से 505.27 करोड़ रूपये के लाभ से, हमने वर्ष 2003-04 हेतु 454.33 करोड़ रूपये का कर-पूर्व लाभांश दर्ज किया है

 

 

 

579.17 करोड़ रूपये की अपेक्षित ऋण चुकाने की क्षमता के विरूद्घ उपलब्ध ऋण चुकाने की क्षमता 793.62 करोड़ रूपये थी

 

31 मार्च, 2004 को किया गया निवेश एवं दिये गये ऋणों की कुल राशि 7356.73 करोड़ रूपये थी जबकि पिछले वर्ष के अन्त में यह राशि 5169.28 करोड़ रूपये थी

 

वर्ष के दौरान कम्पनी का दस्तावेज जारी करने का अनुपात 98% से अधिक रहा, लगभग 82 लाख दस्तावेज जारी किए गए दावा निपटान अनुपात में वर्ष के दौरान वृद्घि रिकॉर्ड की गई तथा गैर वाद दावों का निपटान अनुपात पिछले वर्ष के 87.73% की तुलना में 80.02% रहा।

 

विगत 30 वर्षों के लाभ पर एक नज़र --

 

 

 

कम्पनी केवल "सूचना प्रौद्योगिकी में मैत्रीपूर्ण है" बल्कि "तकनीकी विशेषज्ञ" भी है हमारी अपनी बेवसाइट है एक इंटीग्रेटिड नॉन लाइफ इंश्योरेंस एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (इनलियास) कार्यान्वयन में है तथा 2004-05 में आशा है कि आरंभ हो जाएगा इससे यह सुनिश्चित होता है कि हमारे ग्राहक सेवा मापदण्ड निरन्तर प्रगतिशील हैं

 

आश्चर्य की बात नहीं है कि दि ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी अग्रणी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों सीआरआईएसआईएल (क्रिसिल) तथा आईसीआरए (इकरा) से उच्चतम दर प्राप्त कर रही है

पाँच वर्षों की सूची

 

राशि लाखों में

1999-00

2000-01

2001-02

2002-03

2003-04

सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम

216655

224710

249863

286815

289974

निवल प्रीमियम

163203

172535

181850

189843

203303

निवल दावे

133217

(81.6%)

150206

(87.1%)

182792

(100.5%)

146655

(77.2%)

158764

(78.1%)

प्रचालित व्यय

49424

(30.3%)

45741

(26.6%)

60903

(33.5%)

65259

(34.4%)

78211

(38.5%)

बीमालेखन लाभ/हानि (-)**

(29850)

(-18.3%)

(27560)

(-16.0%)

(25673)

(-14.1%)

(15350)

( 8.1%)

29756

(14.6%)

ब्याज, लाभांश और किराया

36753

39623

10119

7867

8514

कर से पूर्व लाभ

6080

7513

(23485)

17589

45433

कर के बाद लाभ

5519

7418

(23548)

10736

31647

भुगतान की गई राशि

4000

10000

10000

10000

10000

सामान्य रिजर्व

80325

81886

57253

73365

102192

असमाप्त जोखिम हेतु रिजर्व

88206

92353

92130

96395

102452

मूल रिजर्व एवं अन्य रिजर्व

837

837

2565

2565

2565

 

 

% से तात्पर्य है निवल प्रीमियम का प्रतिशत

 

** आई आर डी के नये दिशा निर्देशों के अनुसार 1.4.2001 से बीमालेखन परिणामों में अनुपातिक निवेश आय भी सम्मिलित होगी वर्ष 2001-02 तथा 2002-03 हेतु ब्याज, लाभांश एवं किराये के आँकड़ों में निवेश की बिक्री से हुआ लाभ भी सम्मिलित है 1.4.2003 से ऋण परिशोधन निवेश अपलेखन, शेयरों की कीमत में ह्रास, एनपीए प्रावधान, ब्याज/लाभांश/किराया, निवेश की बिक्री पर लाभ के हिस्से का प्रभाजन करने के बाद बीमालेखन लाभ/हानि की गणना की गई है